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Txs,
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"नियत और नज़रिया" ही एक इंसान को उसकी मंज़िल तक पहुंचता है,"नियत" साफ हो तो मुश्किलों के आने के बाद भी काम बन जाता है,और "नज़रिया" किसी भी काम को आसान बनाता है...
Nice
नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...
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Delete"नियत और नज़रिया" ही एक इंसान को उसकी मंज़िल तक पहुंचता है,
ReplyDelete"नियत" साफ हो तो मुश्किलों के आने के बाद भी काम बन जाता है,
और "नज़रिया" किसी भी काम को आसान बनाता है...
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