Thursday, 27 August 2020

सुखी होने के उपाय

पहली बात: हनुमान जी जब संजीवनी बूटी का पर्वत लेकर लौटते है तो भगवान से कहते है:- ''प्रभु आपने मुझे संजीवनी बूटी लेने नहीं भेजा था, बल्कि मेरा भ्रम दूर करने के लिए भेजा था, और आज मेरा ये भ्रम टूट गया कि मैं ही आपका राम नाम का जप करने वाला सबसे बड़ा भक्त हूँ''।*

*भगवान बोले:- वो कैसे ...?*

हनुमान जी बोले:- वास्तव में मुझसे भी बड़े भक्त तो भरत जी है, मैं जब संजीवनी लेकर लौट रहा था तब मुझे भरत जी ने बाण मारा और मैं गिरा, तो भरत जी ने, न तो संजीवनी मंगाई, न वैध बुलाया।*

*कितना भरोसा है उन्हें आपके नाम पर, उन्होंने कहा कि यदि मन, वचन और शरीर से श्री राम जी के चरण कमलों में मेरा निष्कपट प्रेम हो, यदि रघुनाथ जी मुझ पर प्रसन्न हो तो यह वानर थकावट और पीड़ा से रहित होकर स्वस्थ हो जाए।*उनके इतना कहते ही मैं उठ बैठा।*सच कितना भरोसा है भरत जी को आपके नाम पर।

*शिक्षा :- 🔥*

*हम भगवान का नाम तो लेते है पर भरोसा नही करते, भरोसा करते भी है तो अपने पुत्रो एवं धन पर, कि बुढ़ापे में बेटा ही सेवा करेगा, धन ही साथ देगा।*

*उस समय हम भूल जाते है कि जिस भगवान का नाम हम जप रहे है वे है, पर हम भरोसा नहीं करते।*

*बेटा सेवा करे न करे पर भरोसा हम उसी पर करते है।*दूसरी बात प्रभु...! 🔥

*बाण लगते ही मैं गिरा, पर्वत नहीं गिरा, क्योकि पर्वत तो आप उठाये हुए थे और मैं अभिमान कर रहा था कि मैं उठाये हुए हूँ।*मेरा दूसरा अभिमान भी टूट गया।*

*🔥शिक्षा :- 🔥*

*हमारी भी यही सोच है कि, अपनी गृहस्थी का बोझ को हम ही उठाये हुए है।*

*जबकि सत्य यह है कि हमारे नहीं रहने पर भी हमारा परिवार चलता ही है।जीवन के प्रति जिस व्यक्ति कि कम से कम शिकायतें है, वही इस जगत में अधिक से अधिक सुखी है।

जय श्री राम🙏*

Monday, 17 August 2020

पिता क्यो पिछे

 *फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है*


माँ,  नौ महीने पालती है ,

पिता, 25 साल् पालता है 

*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ, बिना तानख्वाह घर का सारा काम  करती है ,

पिता, पूरी कमाई घर पे लुटा देता है 

*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है‌।


माँ ! जो चाहते हो वो बनाती है ,

पिता ! जो चाहते हो वो ला के देता है ,

*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ ! को याद करते हो जब चोट लगती है ,

पिता ! को याद करते हो जब ज़रुरत पड़ती है, 

*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


माँ, की ओर बच्चो की अलमारी नये कपड़े से भरी है ,

पिता, कई सालो तक पुराने कपड़े चलाता है ,

*फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।


पिता, अपनी ज़रुरते टाल कर सबकी ज़रुरते समय से पुरी करता है,

किसी को उनकी ज़रुरते टालने को नहीं कहता ,

फिर भी न जाने क्यूं पिता पीछे रह जाता है।



Thursday, 16 July 2020

रंगमंच

जीवन के रंगमंच के सब भांति भांति किरदार
नहीं किसी का आपस में मिलता-जुलता अंदाज
                         सब सोचे मैं ही हूं दुनिया का दावेदार
                     भूल जाते परम सत्य की ये तो रैन बसेरा
क्या जाने कब उड़ जाए अच्छा रोल निभाए
छाप अमिट छप जाए जंग में कुछ ऐसा कर जाए
          सत्य, अहिंसा,पुण्य की बातें भी सुनने मिल जाए
           इन राहों पर चलना कहां अब सब को भा जाए
लोभ,मोह,लालच में गिरा मनुज कहां उठ पाए
निन्यानवे के फेर में दिन रात वो डूबा जाए
             इस के खातिर ना जाने कितने कुकर्म कर जाए
               किन्तु सत्य रंगमंच का याद वो ना रख पाए
इस धरा का इस धरा पर ही रह जाए
इसलिए रंगमंच पर अच्छे कर्म कर जाए।
     

Monday, 22 June 2020

संस्कार

आज बड़े दिन बाद फिर मैं अंजली से मिली ।पर अब वो पहले से बहुत बदल गईं थी।हमने पूरा दिन साथ बिताया शादी औऱ नोकरी फिर घर से बाहर कभी फालतू ना आने जाने की उसकी ओर मेरी आदत से बरसों बाद हम एक ही शहर में रहते हुए आज सब्जी खरीदते हुवे आखिर मिल ही गये।वही कहीं साइड में खड़े खडे जो बातें शुरू हुई।पूरा 1 घण्टा निकल गया।तभी दोनो को अपने घर जाने की जल्दी से निकल गए लेकिन इस बीच उसे जो बातें हुई वो जीवन के सभी संस्कारों को याद दिला गयी जो आज बहुत कम दिखने को मिलते है।अंजली से पूछने पर पता चला कि उसकी शादी भले ही पैसे वाले ओर सरकारी रेलवे में नोकरी करने वाले से हुई हो पर जीवन के सही संघर्ष तो शादी के बाद ही शुरू हुवे ।ओर ये सब भी पहले भी मिले पर उसने कभी नही बताया उसके पड़ोसी हमारे मिलने वाले थे उन्होंने बताया।तब जाकर मैने उसे कहा मुझे सब पता है ।कि वो रोज पी कर आता है।और उसकी सारी सैलरी भी वही खत्म हो जाती है।और तुम घर घर काम कर के घर खर्च भी चलाती हो और ससुराल में सब की सेवा भी खूब करती हो।तुम उसको छोड़ क्यो नहीं देती?मेरा उससे ये कहना हुवा ओर उसने तपाक से मुझे जवाब दिया देखो जीवन मे अगर दुःख लिखा है और वो हमारे कर्मों से ही मिलता है ।तो इनको छोड़ने पर दूसरे के साथ भी मिलेगे।क्या तुमने अपने माता पिता को ये सब बताया ।तुम तो उनकी एकलौती बेटी और लाडली हो वो तुम्हे अपने घर रख लेंगे।इस पर भी अंजली ने मुझे बिना सोचे जल्दी ही जवाब दे दिया कि जब मै छोटी थी तो माँ रामायण का पाठ सुनाती थी तब जनक जी की बेटी सीता जी और राम को वनवास हो जाता है।तब मैं माँ से कहती थी कि वनवास तो सिर्फ राम को हुवा सीता जी क्यों उनके साथ दुखी होने वन में जाती है तब माँ कहती थी कि सच्ची पत्नी वही है जो पति का हर परिस्थिति में साथ निभाये।तो तुम ही बताओ में कैसे अपने पति को छोड़ दु।फिर जब मैं अपनी माँ से कहती कि सीता जी के पिता भी तो राजा है और उन्होंने अपनी पुत्री को कितने प्यार से पाला ओर बहुत कुछ दिया तो वो कुछ क्यो नहीं बोलते ओर वो अपनी पुत्री को अपने साथ क्यो नहीं ले जाते।तब माँ कहती कि उन्होंने अपनी पुत्री को अच्छे संस्कार दिये और बड़ों का आदर छोटो से प्यार व किसी काम से जी चुराना नहीं सिखाया।ओर उन्हें यकीन है कि उनकी बेटी कभी ना पति का अपमान करेगी ना ही साथ छोड़ेगी।ओर ससुराल में भी सबका मान रखेगी।ओर ऐसा ही सीता जी ने किया।तो भला मै कैसे मेरे पति को छोड़ू।हो सकता है ये मेरे पिछले जन्म के कर्म हो इसलिए इस जन्म में मैं अपने कर्मों को सबकी सेवा कर के ओर सभी का अच्छा कर के सुधार रही हूं ताकि अगला जन्म कुछ भी हो।इस दुनिया से जाते समय घर में रहे सब लोग कहे कि सच में बहुत अच्छे कर्म किये।और जब साथ शादी की तो पूरी ज़िंदगी साथ दूँगी अब तो अंजली की ये बाते सुन कर उसको देख बहुत ख़ुशी हुई कि आज भी ऐसे संस्कार दुनिया में बचे है।
जहाँ ससुराल को घर मान के प्यार की डोर से बहु बांधती हैं।जो उसे तोडने मे नहीं जोडने मे विश्वास रखती हैं।

Saturday, 30 May 2020

फिर भी पढ़ाई करे

ये लाॅकडाउन हुआ तो क्या ,
स्कूल बंद हुआ तो क्या,
फिर भी पढ़ाई करे ओ साथी
फिर भी पढ़ाई करे ओ साथी।
            ‌ ‌ कभी टी.वी कभी मोबाइल,
             कभी दीक्षा कभी वाट्स अप,
              पर  टिचर से मिले ओ साथी
            उनसे  पढ़ाई करे ओ साथी।
ये मुसिबत कम नहीं है,
कभी विडियो काॅल करे
पर हौसले ना रूकने दे,
फिर भी पढ़ाई करे ओ साथी।
              ‌  सरकार की ये कोशिश
                टिचर के बताए रास्ते
             पर हम तो मिलकर चले ओ साथी
         ‌‌      फिर से पढ़ाई करे ओ साथी।

           ‌‌
                         
                                      ‌‌  ‌

                      ‌‌‌     

Tuesday, 26 May 2020

फितरत

जब मैं पहली बार मेंघा से मिली।मुझे वो बहुत अच्छी लगी।वो बिना किसी की परवाह किए।जो कहना होता सामने वाले को कह देती।ना ये सोचती की उनके मन को कैसा लगेगा। धीरे धीरे मैं उसके साथ रहने लगी।और मैंने एक नई बात समझी‌।कि मेघा उनके साथ बहुत अच्छे से भी रहती थी। मुझे ये दोनों बातें समझ ही नहीं आ रही थी ।कि वो ये सब कैसे कर लेती है। फिर मैं उन लोगों के साथ भी रहने लगी। तो मुझे पता चला कि उसकी इस हरकतों से सब उसे साफ दिल का समझते थे।पर वो तो अपने बारे में सही और अच्छा तथा दूसरे कि छवी बिगाड़ने में लगी रहती थी।वो उन्हीं लोगों की बुराई उनके पिछे से करती रहती थी।ऐसा नहीं बल्कि धीरे-धीरे मैंने जाना कि वो बहुत से लोगों की बुराई करती हैं। कोई ऐसा इंसान नहीं होगा।जिसकी तारीफ वो उसके स्वार्थ के बिना करती हो।और मुंह पर वो उन सब से कभी बहुत अच्छी रहती।और कभी लड़ लेती या ऐसे तिखे शब्दों से बात करती जिससे वो उनसे कितना स्नेह करती हैं। ऐसा ही लगता रहे।और तो और वो हंसी ठिठोली भी कर लेती थी। इतने मैं एक दिन मैंने सोचा जब ये जिनके इतनी करीब हैं ।उनकी बुराई करती भला बुरा कहती हैं और किसी को नहीं छोड़ती । तो वो मुझे क्या छोड़ेगी।और धीरे धीरे मैं उससे दूर हो गई।और जैसा मैंने सोचा वैसा ही करने लगीं। वो मेरी बुराई और अपने को अच्छा बताने में लगी रहती थी।
लेकिन एक बार में मुझे उसे दूर होने पर ये बात समझ में आई कि भविष्य में ऐसे लोगों से दूर रहें।

Tuesday, 19 May 2020

मां के रक्षक

मां के गौरव की रक्षा को,
निज प्राणों की आहुति दूं‌।
             ये कर ना सका मेरा तन तो,
       ‌        फिर इस मां की धरा पर व्यर्थ रहूं।
दुश्मन नित दिन शीश उठाते हैं,
मां के आंचल को छलते हैं।
               मैं पूत्र कहो फिर कैसा हूं,
                 छलनी ना कर दूं दुश्मन को
रण में जाए प्राण अगर,
आतुर ना होना मां मगर
                हर सैनिक पूत्र मां यही कहें
               ‌ तेरी आंचल की रक्षा का कर्तव्य करें
हम रक्षा को तैयार खड़े
तिंरगे में लिपट के देह सजे।
                         

बेटी दिवस की शुभकामनाएं

 नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...