Monday, 22 June 2020

संस्कार

आज बड़े दिन बाद फिर मैं अंजली से मिली ।पर अब वो पहले से बहुत बदल गईं थी।हमने पूरा दिन साथ बिताया शादी औऱ नोकरी फिर घर से बाहर कभी फालतू ना आने जाने की उसकी ओर मेरी आदत से बरसों बाद हम एक ही शहर में रहते हुए आज सब्जी खरीदते हुवे आखिर मिल ही गये।वही कहीं साइड में खड़े खडे जो बातें शुरू हुई।पूरा 1 घण्टा निकल गया।तभी दोनो को अपने घर जाने की जल्दी से निकल गए लेकिन इस बीच उसे जो बातें हुई वो जीवन के सभी संस्कारों को याद दिला गयी जो आज बहुत कम दिखने को मिलते है।अंजली से पूछने पर पता चला कि उसकी शादी भले ही पैसे वाले ओर सरकारी रेलवे में नोकरी करने वाले से हुई हो पर जीवन के सही संघर्ष तो शादी के बाद ही शुरू हुवे ।ओर ये सब भी पहले भी मिले पर उसने कभी नही बताया उसके पड़ोसी हमारे मिलने वाले थे उन्होंने बताया।तब जाकर मैने उसे कहा मुझे सब पता है ।कि वो रोज पी कर आता है।और उसकी सारी सैलरी भी वही खत्म हो जाती है।और तुम घर घर काम कर के घर खर्च भी चलाती हो और ससुराल में सब की सेवा भी खूब करती हो।तुम उसको छोड़ क्यो नहीं देती?मेरा उससे ये कहना हुवा ओर उसने तपाक से मुझे जवाब दिया देखो जीवन मे अगर दुःख लिखा है और वो हमारे कर्मों से ही मिलता है ।तो इनको छोड़ने पर दूसरे के साथ भी मिलेगे।क्या तुमने अपने माता पिता को ये सब बताया ।तुम तो उनकी एकलौती बेटी और लाडली हो वो तुम्हे अपने घर रख लेंगे।इस पर भी अंजली ने मुझे बिना सोचे जल्दी ही जवाब दे दिया कि जब मै छोटी थी तो माँ रामायण का पाठ सुनाती थी तब जनक जी की बेटी सीता जी और राम को वनवास हो जाता है।तब मैं माँ से कहती थी कि वनवास तो सिर्फ राम को हुवा सीता जी क्यों उनके साथ दुखी होने वन में जाती है तब माँ कहती थी कि सच्ची पत्नी वही है जो पति का हर परिस्थिति में साथ निभाये।तो तुम ही बताओ में कैसे अपने पति को छोड़ दु।फिर जब मैं अपनी माँ से कहती कि सीता जी के पिता भी तो राजा है और उन्होंने अपनी पुत्री को कितने प्यार से पाला ओर बहुत कुछ दिया तो वो कुछ क्यो नहीं बोलते ओर वो अपनी पुत्री को अपने साथ क्यो नहीं ले जाते।तब माँ कहती कि उन्होंने अपनी पुत्री को अच्छे संस्कार दिये और बड़ों का आदर छोटो से प्यार व किसी काम से जी चुराना नहीं सिखाया।ओर उन्हें यकीन है कि उनकी बेटी कभी ना पति का अपमान करेगी ना ही साथ छोड़ेगी।ओर ससुराल में भी सबका मान रखेगी।ओर ऐसा ही सीता जी ने किया।तो भला मै कैसे मेरे पति को छोड़ू।हो सकता है ये मेरे पिछले जन्म के कर्म हो इसलिए इस जन्म में मैं अपने कर्मों को सबकी सेवा कर के ओर सभी का अच्छा कर के सुधार रही हूं ताकि अगला जन्म कुछ भी हो।इस दुनिया से जाते समय घर में रहे सब लोग कहे कि सच में बहुत अच्छे कर्म किये।और जब साथ शादी की तो पूरी ज़िंदगी साथ दूँगी अब तो अंजली की ये बाते सुन कर उसको देख बहुत ख़ुशी हुई कि आज भी ऐसे संस्कार दुनिया में बचे है।
जहाँ ससुराल को घर मान के प्यार की डोर से बहु बांधती हैं।जो उसे तोडने मे नहीं जोडने मे विश्वास रखती हैं।

Saturday, 30 May 2020

फिर भी पढ़ाई करे

ये लाॅकडाउन हुआ तो क्या ,
स्कूल बंद हुआ तो क्या,
फिर भी पढ़ाई करे ओ साथी
फिर भी पढ़ाई करे ओ साथी।
            ‌ ‌ कभी टी.वी कभी मोबाइल,
             कभी दीक्षा कभी वाट्स अप,
              पर  टिचर से मिले ओ साथी
            उनसे  पढ़ाई करे ओ साथी।
ये मुसिबत कम नहीं है,
कभी विडियो काॅल करे
पर हौसले ना रूकने दे,
फिर भी पढ़ाई करे ओ साथी।
              ‌  सरकार की ये कोशिश
                टिचर के बताए रास्ते
             पर हम तो मिलकर चले ओ साथी
         ‌‌      फिर से पढ़ाई करे ओ साथी।

           ‌‌
                         
                                      ‌‌  ‌

                      ‌‌‌     

Tuesday, 26 May 2020

फितरत

जब मैं पहली बार मेंघा से मिली।मुझे वो बहुत अच्छी लगी।वो बिना किसी की परवाह किए।जो कहना होता सामने वाले को कह देती।ना ये सोचती की उनके मन को कैसा लगेगा। धीरे धीरे मैं उसके साथ रहने लगी।और मैंने एक नई बात समझी‌।कि मेघा उनके साथ बहुत अच्छे से भी रहती थी। मुझे ये दोनों बातें समझ ही नहीं आ रही थी ।कि वो ये सब कैसे कर लेती है। फिर मैं उन लोगों के साथ भी रहने लगी। तो मुझे पता चला कि उसकी इस हरकतों से सब उसे साफ दिल का समझते थे।पर वो तो अपने बारे में सही और अच्छा तथा दूसरे कि छवी बिगाड़ने में लगी रहती थी।वो उन्हीं लोगों की बुराई उनके पिछे से करती रहती थी।ऐसा नहीं बल्कि धीरे-धीरे मैंने जाना कि वो बहुत से लोगों की बुराई करती हैं। कोई ऐसा इंसान नहीं होगा।जिसकी तारीफ वो उसके स्वार्थ के बिना करती हो।और मुंह पर वो उन सब से कभी बहुत अच्छी रहती।और कभी लड़ लेती या ऐसे तिखे शब्दों से बात करती जिससे वो उनसे कितना स्नेह करती हैं। ऐसा ही लगता रहे।और तो और वो हंसी ठिठोली भी कर लेती थी। इतने मैं एक दिन मैंने सोचा जब ये जिनके इतनी करीब हैं ।उनकी बुराई करती भला बुरा कहती हैं और किसी को नहीं छोड़ती । तो वो मुझे क्या छोड़ेगी।और धीरे धीरे मैं उससे दूर हो गई।और जैसा मैंने सोचा वैसा ही करने लगीं। वो मेरी बुराई और अपने को अच्छा बताने में लगी रहती थी।
लेकिन एक बार में मुझे उसे दूर होने पर ये बात समझ में आई कि भविष्य में ऐसे लोगों से दूर रहें।

Tuesday, 19 May 2020

मां के रक्षक

मां के गौरव की रक्षा को,
निज प्राणों की आहुति दूं‌।
             ये कर ना सका मेरा तन तो,
       ‌        फिर इस मां की धरा पर व्यर्थ रहूं।
दुश्मन नित दिन शीश उठाते हैं,
मां के आंचल को छलते हैं।
               मैं पूत्र कहो फिर कैसा हूं,
                 छलनी ना कर दूं दुश्मन को
रण में जाए प्राण अगर,
आतुर ना होना मां मगर
                हर सैनिक पूत्र मां यही कहें
               ‌ तेरी आंचल की रक्षा का कर्तव्य करें
हम रक्षा को तैयार खड़े
तिंरगे में लिपट के देह सजे।
                         

Saturday, 9 May 2020

हमसफर

रिश्तों की परवाज़ यूं उड़ी,
जाकर सीधी हमसफर से जुड़ी।
           पहले पहले बहुत हिचकिचाहट हुई,
            जब तक जान पहचान ना हुई।
धीरे धीरे सफर की शुरुआत हुई,
तब जाकर पंतग दिल के आसमान तक गई।
        ‌‌‌     अब हौले हौले वो दिल में हिलौरें लेती हुई,
               कुछ सांसों की डोर से भी बंधती गई।
हमसफर के आगे सब फिका लगने लगा,
तब रिश्ता मजबूत लगने लगा।
     ‌‌‌         पिया के आने की जब राह देखती,
               तब  तो नजरें भी सवाल करती।
कभी जो उड़ता परिंदा थी,
आज वो किसी के नाम हो गई।
               

Saturday, 2 May 2020

दोस्ती

हर रिश्ते सी पवित्र हैं दोस्ती,
         सागर से भी गहरी हैं दोस्ती।
मां की ममता सी छांव है दोस्ती,
         भाई बहनों के प्यार सी  है दोस्ती।
‌‌कुछ उलझे रिश्तों की सुलझन हैं दोस्ती,
          फंसे मंजर से बाहर निकालती हैं दोस्ती।
कई पुण्यो मिलती है दोस्ती,
            खुदा की रहमत होती हैं दोस्ती।
चंद फासलों से भूली नहीं जाती हैं दोस्ती।
               मुस्कुराहट देने वाली जादू है दोस्ती,
कृष्ण सुदामा सी प्यारी होती हैं दोस्ती।
                    गिले शिकवे मिटाती है दोस्ती,
कहीं नजर ना लगे जाए मेंरे दोस्त को,
                       इसलिए मैं ना बताती हूं दोस्ती।
सबसे छुपाती हूं मैं अपनी दोस्ती,
                दुनिया में कयामत तक सलामत रहें दोस्ती।
             

Thursday, 30 April 2020

भूलें नहीं जाते

भूलें नहीं जाते हैं वो बीते हुए दिन,
अरे खट्टे मीठे बचपन के वो आइसक्रीम वाले दिन।
           गर्मियों की छुट्टियों में कंचे वाले दिन,
            भाग भाग के तोड़ रहे वो कैरी वाले दिन।
स्कूल जाते मस्ती करते किसी की नहीं है सुनते,
बात बात पर खींचा तानी फिर भी मिलते-जुलते।
                 भूलें नहीं जाते हैं वो स्कूल वाले दिन,
               अरे होमवर्क नहीं होता तो बहाने वाले दिन।
भूलें नहीं जाते हैं वो बीते हुए दिन,
कॉलेज जाना  तैयार होना सबसे आगे रहना।
           ‌‌ कैंटीन भी मिस नहीं करना बड़ा है याद आता ‌
   ‌‌‌           मम्मी की डांट है खाना कभी न भूला जाता।
भूलें नहीं जाते सितौलिया वाले दिन,
अरे आंख मिचौली खेल खेल के पकड़ाई वाले दिन।
            ‌‌      भूलें नहीं जाते हैं वो बीते हुए दिन,
        अरे खट्टे मीठे बचपन के वो आइसक्रीम वाले दिन।
 

बेटी दिवस की शुभकामनाएं

 नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...