Monday, 23 April 2018

ट्रांसफर एक कैसा शबद है जिसे से
किसी को खुशी तो किसी को दुख होता है
पर जब ये होकर भी नही होता तो 
कैसा होता है ये तो वो ही जानता है 
जिसका सब कुछ अधर में अटका है
कई सालों से वो जिसकी बाट निहारता है
वो बस होने ही वाला होता है कि तभी
एक जोर से जैसे तूफान सा आकर उसे रोक
देता है आखिर जब ये करना ही नही होता है
तो क्यो जूठी आस बंधाते है क्यो पूरे साल
उसे उसी एक ट्रांसफर के पीछे गुम्माते है
बिचारे वो क्या करे अब जो पूरा मानस ही
बना बैठे थे घर जाने का परिवार को ले गए
कही और अब घर जमाने का कर लिया 
बसेरा उनका तो सब कुछ फिर बर्बाद 
कर दिया इस रोक ने अब मन कैसे 
लगेगा फिर वहां उनका जो छोड़ने की 
सोच बैठे थे वो जगह ओर नई जगह की
तरफ रुख कर लिया था गाड़िया लोहार सी 
जिंदगी बना दी आज यहाँ कल फिर 
वहां कैसे मन को मार के वो अच्छे
से सब कर पायेंग !

Thursday, 11 January 2018

स्कूल की यादे

वो स्कूल के दिन बडे याद आते है 
जब स्कूल जाने से जी चुराते थे 
बस ये सोचते थे कि काश आज छुट्टी हो जाये 
ओर स्कूल जाकर बस मस्ती 
डस्टर को फेक कर मारना
टेबल पर लंच में नाचना 
ओर खूब दौड़ लगाना 
लंच में भाग के निचे जाना 
ओर गोल गप्पे वाले के यहां धूम मचाना
पास वाले कि कॉपी को खीचना 
ओर टीचर को वापस उसी की
शिकायत करना कि ये मस्ती कर रहा है
ये स्कूल के दिन बड़े याद आते है 
किसी के बर्थडे पर स्कूल में 
ही नाचना ओर जोर जोर से विश करना
पिकनिक पर खूब गाना ओर खाना
ओर घर आकर बीमार हो जाना 
फिर दूसरे दीन फिर मस्ती करना
ये स्कूल के दिन बड़े याद आते है,

Tuesday, 9 January 2018

जीवन की सच्चाई

ये बात उस मासूम की है जो ये जानती ही नही की उसे कितने संघर्ष करने है जब पड़ने की उम्र होती है खलने की तभी से उसने जिम्मेदारी उठाने की सोच ली |सिर्फ 12 साल में ही उसने अपने सपनो की जंग शुरू कर दी इस बीच सिर्फ उसे ये ही डर था कि मेरी पढ़ाई कही मजेदार में ना छूट जाए कही पल ऐसे आये जब उसे लगा कि पढ़ाई छूटने वाली है पर फिर उसने हिम्मत से उसे संभाल लिया
इतनी सी उम्र में उसे डर भी की वो एक लड़की है दूसरा उसे सपना भी पूरा करना है कुछ बनाना है हमारे ही पड़ोस में रहने वाली ये लड़की सबके लिए एक प्रेरणा थी|
जब हम आराम से स्कूल जाते खेलते मस्ती करते बाते करते सोते खूब खाते फिर मस्ती खेल ये सिर्फ अपने परिवार ओर सपनो के पीछे भागती थी|
ये लड़की है वीना जो हमारे ही पड़ोस में रहती थी स्कूल से लौट कर ये घर घर जाकर काम करती थी वो काम सिर्फ अपनी पढ़ाई और जरूरतों के लिए था शुरआत उसने डांस से की पर लोगो ने बाते बनाना शुरू कर दिया कि ये क्या काम है क्योकि उस जमाने मे इसका सीखाने का कुछ नही था और वो एक छोटा सी जगह जहा हर कोई उसके मनोबल को गिराने में लगे थे उसे भी डर था कि कही कुछ गलत तो नही पर कुछ और भी वो कर नही सकती थी क्योंकि उसके परिवार की स्थिति पहले बहुत अच्छी थी अचानक व्यपार में गाटे के कारण वो तो खराब हो गई उसने ये ही सोच कर डांस को चुना लेकिन लोग कहा कम होते है लेकिन उसने हार नही मानी और अपना काम शुरू रखा सिर्फ 35 रू से शुरू किया उसने दीन  भर  से शाम हो जाती थी उसको घर आते आते और फिर घर आकर वो थोड़ी देर के बाद पड़ने बेट जाती थी धीरे धीरे उसका ये काम ठीक चलने लगा पर उसकी पढ़ाई उससे छूटने लगी उसका सपना भी इन सब के बीच कही खो गया लेकिन फिर भी उसने उमीद नही छोड़ी अब वो डांस के साथ ओर भी  काम करने लगी जैसे मेहंदी तो अब घर आते आते उसे रात हो जाती थी लेकिन इन सब के बाद कि लोग रात को लड़की आती है क्या ऐसा क्या काम लड़की को तो घर मे ही रखना चाईए तरह तरह की बात और कमैंट्स लेकीन वो दुःखी होती थी फिर सम्भल जाती इन सब में सिर्फ एक ही बात थी जो हमेशा उसको हिम्मत देती वो थी उसके मा बाप का उस पर विश्वास और स्पोट जो उसको सारी बाते भुला के आगे बढने में मदद करता था
आप सोच रहे हो गए कि लोग ओर बच्चे बहुत दुःख देखते है इतनी हालत खराब होती है कि बर्तन तक साफ करने पड़ते है भूखे भी रहना पड़ता था लेकिन इस
कहानी को मैने क्यो आपको बताई क्योकि इस लड़की ने हालात के सामने गुटने नही टेके जो बहुत से बच्चे कर लेते है वो अपनी पडाई  छोड़ देते है|लेकिन जीवन मे कितने भी दुख क्यो ना हो उसको देख के मुझे ये ही लगता था कि अपनी पढ़ाई नही छोड़नी चाहिए क्योंकि ये ही हमे सब से बाहर निकाल सकती है| और उसके पास या उसके मा बाप के पास पडा ने के पैसे भी नही तब उसकी मौसी ने सबसे ज्यादा सहारा दिया वो नही होती तो वो बीच मे बचपन मे ही पढ़ाई से बहुत दूर हो जाती कहते है मौसी माँ जैसी होती है ये बात सिर्फ उसकि मौसी को देख के लगता था |जो उसकी परिवार और उसके सब भाई बहनों का बहुत ध्यान और ख़याईश पूरी करती थी |तब वो भी एक प्राइवेट स्कूल टीचर थी और बहुत कम जो भी मिलता सब वो उन पर ही खर्च कर देती थी"| लेकिन जब मौसी की शादी हो गए और उसने दूसरे तरफ अपनी मंजिल ढूंढी कुछ और बनने की सोची तो फिर पैसे नी होने से एक बार सोचा सब छोड़ दे लेकिन उसके भाई ने दुसरो से ब्याज पर पैसे लाकर उसको पढ़ाया ओर जब कुछ लायक बनी तो वो ही भाई उसे हमेशा के लिए दूर हो गया|😢
लेकिन बीच मे उसकी शादी हो गई वो तो कुछ बन गई लेकिन उसके दूसरे भाई बहनों ने हालात के सामने थक गए और उन्होंने पढ़ाई को बीच मे ही छोड़ दिया वो आज भी रोज एक नई जंग के लिए तैयार होना पड़ता है क्योंकि उनकी स्थिति सही होने का नाम ही नी लेती
काश!वो सब भी अच्छे से पढ़ लेते तो शायद उनके भी संघर्ष कम हो जाते और आज पढ़ाई का महत्व बहुत है |
जीवन मे कितनी भी मुश्किल क्यो ना हो लेकिन पढ़ाई को कभी नही छोड़ना चाहिए क्यो की वो ही एक हतियार है जो उस मुश्किल ओर हर मुस्कील समय से इंसान को बाहर निकाल सकता है|
 तूफान कितना भी क्यो ना हो
  होसलो के सामने टिक नही पाता

Wednesday, 3 January 2018

इंतजार

"रात की तन्हाई में आवाज दिया करते है
चाँद ओर तारों से तेरा जिक्र किया करते है
हकीकत में तुम आओ ना आओ
खवाबो  में तुम्हारा इंतजार किया करते है|

"अश्क नयनो में आते है तो पी लेते है हम
जब याद तेरी आती है तो रो लेते है हम
नींद तो आती नही पर यू सोचकर
 खवाबो में तुम आओगे सो लेते है हम|

"तु नही तो दिल मेरा उदास है
सुनी जिंदगी की तू एक लोती आस है
सासो में आ रही तेरी खुशबु तू दूर है
निगाहो से मगर दिल के पास है|



Sunday, 31 December 2017

यादे

"😢जब कभी याद मायके की आती हैं
तो आँखे नम सी हो जाती है|
वो बीते पल यू आँखों के सामने आते है
जैसे पुरानी किताबों के पन्ने खुल जाते है|
हर गली में बस अपना ही रुतबा
वो बाहर निकल कर भगना
वो मम्मी  का बार बार बुलाना
और चुपके से सबसे बदल जाना
हर रिश्ते में एक अलग सी मिठास थी |
वो पापा का रोज कुछ नया लाना
ओर आपस मे जगड़ कर खाना
वो मिलकर पड़ोसी को चिढ़ाना
ओर गणगोर में खूब नाचना |
वो मामा से चॉकलेट खाना
ओर मौसी की बराबरी करना
नानी के बिना नींद ना आना
ओर नाना से रोज आइसक्रीम खाना
ये पल कुछ खो से गये है काश
ये पल लोट के आ जाये तो
 जिंदगी जन्नत हो जाये|"




"बेटी का रिश्ता सिर्फ पहले ही होता हैं
विदाई के बाद उसका कुछ नही रहता है |
जो मुश्किल माँ बाप ने देखी उसकी
सबको भूला के बस ससुराल होता है |
ये रीत किसने बनाई होगी
जिसकी भी होगी शायद उसके बेटी ना होगी|
जो दर्द माँ बाप देखते है
उनसे रिश्ते पल में टूटते है
वो सब अपने होते है जिनसे
कुछ पल पहले ही  मिलते है
हा सच है ये भी की वो अपने है|
पर जो पीछे छूट गये वो कब पराये है
ये बात समाज समझता नही
जो समझते है वो भी मानते नही
जन्म दिया जिसने कैसे तकलीफ में छोड़ दे
जिनके आँचल में बड़े हुए उन्हें मझदार में छोड़ दे|"

Saturday, 30 December 2017

जाने क्या सोचती रहती हूं आजकल
एक उदेर्ड बुंन्न मे लगी रहती हूं आजकल
सफऱ को रफ्तार देने की सोचती हूं फिर 
कोई और सोच में डूब जाती हु आजकल
बिन परिदों के पर लगे है सोच में 
जाने क्या सोचती रहती हूं आजकल 
हकीकत को खवाबो से जोड़ती हु आजकल 
कुछ नया करने की सोचती हूं आजकल 
पर बेड़िया पैरो में लगी 

Friday, 29 December 2017

राहे

"मेरी राहे सफलता की आसान ना थी 
हर राहो में सिवा मुश्किल के कुछ नही था|
देखा जो सपना वो सच तो हुआ 
लेकिन वो एक कहानी के कुछ नही था  |
जो उम्मीद थी खवाबो से वो सच ना हुई 
मंजर मुस्किलो का बढ़ता गया
 सोचा हुवा सपना मेरा खाली सा हुवा |
देखा जीवन के पल कुछ  खो से  गए 
जो खो गए वो वापस ना मिले 
तकदीर से मिला जो काफी नही था" |


बेटी दिवस की शुभकामनाएं

 नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...