Tuesday, 5 January 2021

  मां सी होती है मौसी

ममता की मूरत जैसी 

परछाई भी बिल्कुल वैसी

शीतल छाया मां के जैसी

हमसे लाड लड़ाती इतना 

आंचल  में छुपाती उतना

 नजर कहीं लग जाए ना

 पल-पल बलाई लेती उतना

 ठेस कहीं लग जाए हमको

मन को यह भाता ना उसको 

 व्याकुल सी हो जाती वह भी

और ज्यादा ज्यादा प्यार लुटाती

जल्दी जल्दी ठीक हो जाए

 ईश्वर से वह प्रार्थना करती

कदम छू ले ऊंचाइयों के हम

वह नित नित ये प्रार्थना करती


Monday, 4 January 2021

मिस यू,लवयू से उठकर देखा

 मिस यू

लवयू 

से उठकर देखा तो 

तो मां याद आई मुझे

जो पापा के काम पर

जाने के बाद उनके आने तक

कभी उसने मिस यू न कहां

पर अगर चुड़ी चटकी और

आंख फड़की तो फिर भगवान

से भी लड़ जाती  जब तक  पापा

न आए तो मजाल है भगवान भी

चले जाएं बहुत जिद्दी होती है माएं

पापा को कभी मिस नहीं करती बस

याद करती है दुआ करती है कि सही

सलामत घर आ जाएं कोई मन्नत

मांग लेती है पर मिस नहीं करती

न कभी मिस यू न कहती तो लव यू

क्या कहेगी दिन दिन भर भूखी रहती

हर हाल में उसके साथ खड़ी रहती

बस चेहरा देख समझ जाती हर

तकलीफ़ नाप लेती लडती उसी से

फिर उसके ही सिने से लग रो पड़ती

पर आई लव यू नहीं कहती 

मां  पापा का प्रेम ऐसा है कि

बिन  कुछ कहे सब समझ जाते हैं

मौन भाषा में भी हर बात साझा

हो जाती है पर मां पापा की बात

कभी भी मिस यू और लव यू

पे खत्म नहीं होती बस सांसों

और धड़कनों पर चलती है

हिन्दुस्तान में हर जिंदगी

बस इसी तरह हंसती है ।


Sunday, 25 October 2020

रावण हंसकर पूछ रहा


 रावण हंसकर पूछ रहा ये 

दुनिया तुम बतलाओ ना 

राम ने जब से मुझको मारा 

तुम भी मुझे जलाते हो 

अपने अंदर झाको जरा अपने अंदर झांको 

क्या तुम में बुराई नहीं 

मैंने कुल के उद्धार हेतु

सीता को उठाया था

 फिर भी मैंने नारे के अस्तित्व को नहीं छुआ 

मर्यादा में रहकर मैंने उनको रखा था

 किंतु आज नजर उठाओ 

इतने रावण पाओगे 

मेरे नाम के भी लायक नहीं 

इतने कलंकी पाओगे 

किसी किसी के मन में तो

बस छल का ही साया है 

कपट द्वेष और अहंकार की चारों ओर माया है 

स्वार्थ से भरा हुआ जब मनुज हुआ है 

तो मुझको जलाने से क्या फायदा होगा 

जलाना है तो  बुराई जलाओ

 जो नष्ट हुई तो  दशहरा मनाओ

वरना भ्रम में जीने का कुछ 

सारांश नजर ना होता मुझको

रावण हंसकर पूछ रहा ये,

 दुनिया तुम बतलाओ ना||


Thursday, 1 October 2020

बलात्कारियों को मिटा दो

सिसक कर रोज रोता है, सुबह अखबार देश में

दरिंदे भेडियो से है ,भरा बाजार देश में

खबर सुन रेप का ऐसा ,दहल जाता हमारा दिल

न जाने चूक करती है, कहां सरकार देश में

मनुजता छोड़  पशुता की ,रफ्तार बड़ी  देश में

जरा सोचो यहां कैसे, रहेगी बेटियां सबकी

हदे हैवानियत की जब,करे नर पार देश में

रही ना  शेष  इनमें कुछ,इंसानियत बाकी

तो क्यों ना सरेआम इनको जला दे देश में

अगर इस तरह सबक मिला ना इनको

         तो बढ़ते रहेंगे पाप देश में


Tuesday, 15 September 2020

कन्यादान


कई जन्म के पुण्य हमारे, जब संचित हो जाते हैं।

तब पुत्री के रूप में कोई, कन्या को हम पाते हैं।।

सहज नही होती है कन्या, करुणा की अवतारी है।

शक्ति स्वरूपा प्रेम प्रतीता, वो तो तारणहारी है।।

इस हेतु जरूरी है कन्या का, मान और सम्मान करें।

भाग्य और सौभाग्य हमारा, इसपर हम अभिमान करें।।

नेह स्नेह से पालन पोषण, उसका लाड़ दुलार करो।

खुद से ज्यादा तनया को ही, जी भरकर तुम प्यार करो।।

किन्तु कहो क्या शुभ की बेला, सदा सनातन होती है।

कालचक्र में कभी कभी तो, बेबस आँखें रोती हैं।।

यूँ ही लाडो आखिर इक दिन, अपने घर तो जाएगी।

और वहाँ भी नेह स्नेह का, डंका खूब बजाएगी।

आओ उसके विदा पर्व का, अंतस से संज्ञान करें।

*तीन लोक में सबसे दुर्लभ, आओ कन्यादान करें।।


Friday, 4 September 2020

डॉक्टर सर्वपल्लीराधाकृष्णन

 

5 सितम्बर ंशिक्षक दिवस ंआज पूर्व राष्ट्रपति डॉ राधाकृष्णन का जन्मदिन जिन्होंने शिक्षा के महत्व को प्रतिपादन किया ,यह शुभ दिन हमारे पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्म दिवस पर शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है । 

 संसार के महान दार्शनिक भारत के सर्वोच्च पद पर स्थित राष्ट्रपति और संसार के महान विश्वविद्यालय में पढ़ाने वाले शिक्षक के रूप में विख्यात हैं।            

        उन्होंने इन तीनों रूपों में अपनी ज्ञान गरिमा और आदर्श जीवनचर्या का परिचय दिया। जीवन तथा जगत को सच्चाई से अवगत करवाया , और ये बता़या निर्भीक और सत्यवादी होता है ज्ञान ।

दर्शनशास्त्र इसी सच्चाई का अन्वेषण करता है। डॉ, राधाकृष्णन ज्ञान की इसी उच्चतम स्थिति में आधिष्ठित थे। भारत सरकार ने उन्हें रूस में भारत का दूत बनाकर भेजा था उनकी भेंट प्रशासक स्टालिन से तय की गई थी । जहाज के डेक पर निश्चित की गई ।

स्टालिन ने राधा-कृष्ण से पुछा आपको हमारा देश कैसा लगा डॉक्टर डॉ राधाकृष्णन ने कहा यहां तानाशाही है और जहां तानाशाही है वहां व्यक्ति की पूजा  होती है । आपका देश तथा उसकी जनता आजाद  नहीं कही जा सकती । स्टालिन के तेवर चढ गए। मुलाकात में खत्म हो गई। डॉक्टर राधाकृष्णन विदा हुए। उन्हें अपने स्तर के परिणाम के प्रति का प्रिया का अनुमान था सेक्रेटरी ने स्टालिन से पूछा, इस व्यक्ति से क्या और कैसा व्यवहार किया जाए ? स्टालिन ने  कहा जाने दो यह राजनीतिक नहीं है,, दार्शनिक है ,स्टालिन राजनीति को दर्शनिक का फर्क जानता था। वह जानता था राजनीतिक कभी सच नहीं बोलता ,और दार्शनिक कभी झूठ नहीं बोलता ।

उनका जन्म दिवस शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसका तात्पर्य है कि शिक्षक दार्शनिक राष्ट्रपति से बढ़कर होता है । हर प्रकार से शिक्षक का पद संसार में सर्वाधिक ऊंचा माना जाता है। इसलिए डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्मदिन के शिक्षकों होने की विशेषता से यह सम्मान प्राप्त कर गया।शिक्षक में राष्ट्रपति की महानता और दार्शनिक की सच्चाई और ज्ञान को समाहित होता है ।मनुष्य मात्र के कल्याण की कामना होती है। गुरु को ईश्वर से ऊंचा स्थान दिया जाता है कबीर  कहते हैं ,,,

गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागू पाय भला हुआ गुरु आपने गुरु आपने जीण गोविंद दियो बताए,,


Tuesday, 1 September 2020

दिल में राम लिखा


लिखे राम  पे  ग्रंथ  किसी ने  

हमनें   दिल   में  राम लिखा  । 

सबने  उनके  काम को पूजा  

हमनें    बस निष्काम लिखा  ।।  

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कहे किसी नें  मानव  उनको  


लगे   किसी  को  अवतारी   ।  

सुलगे  लाखों प्रश्न  राम  को  

जब भी  पूर्ण   विराम लिखा  ।। 

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जगपालक जन मन के नायक 

जननी  ,जनक    दुलारे    को  । 

राजा   माना   बहुतेरों      नें  ,  

हम    नें   बस  आवाम लिखा ।। 

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पावन सरयू   सलिला   जैसी  

श्यामल   जिनकी  काया  थी । 

उनके   श्री   चरणों को छूकर  

हमनें    सिर्फ    प्रणाम लिखा ।।  

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दुराचार  के    संहारक    थे  , 

सदाचार   के    पोषक    जो  ।।  

ऐसे   पालनहार   प्रभू    को  , 

हमनें    भी     सुखधाम लिखा ।।  🙏

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जिनके  छूने   से  पत्थर   में 

प्राणों     का     संचार  हुआ  । 

हमनें उस पग  के रज कण को ,

साधक    का    परिणाम लिखा ।।   

बेटी दिवस की शुभकामनाएं

 नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...