Sunday, 12 April 2020

जंग-ए-कोरोना

लक्ष्मण रेखा तू पार न कर,
इंसानियत पर ये एहसान कर।
बिन वर्दी के तू फौजी हैं,
ये सोच के नियम पालन कर।
              हम अगर ये जंग जीत जाते,
               महामारी से फिर उभर जाये।
               जीवन पटरी पर आ जाये,
    ‌         जो वक्त़ मुश्किल ये गुजर जाये।
ये हिन्दू-मुसिलम वक्त नहीं,
मिल कदम उठाए सख्त सही।
जंग में मिसाल हम बन जाये,
जो जंग-ए-कोरोना जीत जाये।
                मुमकिन है दिक्कत बढ़ जाये,
                 ना मुमकिन कोई काम नहीं।
                 ये सोच कर जो बैठ गए,
                  सारी मुश्किल ही मिट जाते
                  हम जंग-ए-कोरोना जीत जाते।
                 
                   कवयित्री-हेमलता पुरोहित
                     


Wednesday, 8 April 2020

याद

आज फिर मां याद आई,
वैसे तो भूली नहीं गई।
क्यों जब भी मुसिबत आई,
हरदम तुम याद आई।
               कुछ ना होने पर भी तुम,
                मैं दुर हूं ये सोचकर ही तुम,
                हरपल घबराती थी तुम,
              छुट्टी लगते ही पास बुलाती थी तुम
आज फिर मां याद आई,
वैसे तो भूली नहीं गई।
अब मन नहीं करता मेरा,
उस शहर फिर जाने को,
पता है मां अगर आज तुम होती
तो फिर मेरी फिकर में डूबी होती।
                               आज फिर मां याद आई,
                                वैसे तो भूली नहीं गई।
                               क्या अब मन नहीं करता तेरा,
                              दूर से  पास बुलाने को
   ‌‌‌                           सबसे पहले तुम ये ही कहती,
                        ‌    जो भी होगा सब छोड़ के आजा ।
    आज फिर मां याद आई,
वैसे तो भूली नहीं गई। 
ये फिकर आज बड़ी याद आई,
तेरे जाने से किसी ने नही जताई।😢              

Monday, 6 April 2020

कर्म की पूजा

बात उन दिनों की है।जब मै किसी गाँव मे रहती थी।मेरे घर के पास जो घर था। वहाँ एक माँ अपने कहीं बच्चो के साथ रहती थी।उनके जीवन के बारे में सुन के लगा कि उन्होंने अपने जीवन मे बहुत दुःख देख कर बच्चों को बड़ा किया।पर अपने बच्चो को शिक्षा अच्छी दी थी। उस माँ के 11 बच्चे थे। 7 लडकिया ओर 4 लड़के थे।सब बड़े अच्छे से एक छोटे से घर मे रहते थे।माँ और बाप दोनो ने बहुत मेहनत कर उनको पढ़ाया।कुछ पढ़े कुछ ना पढे।लेकिन काम मे सब एक से बढ़ कर एक थे।
धीरे धीरे सब बड़े हो गये।लेकिन साथ मे उस माँ को भी बीमारी हो गई।बीमारी से माँ हमेशा सिर्फ अपने बच्चो के बारे में सोचती।लड़कियों की शादी कर दी।जैसे भी कर के उसके लड़के भी बहुत समझदार थे।उन्होंने दुख की घड़ी में मेहनत कर कर के अपने भाई बहनों का ध्यान रखा।
   उनके इस तरह की मेहनत को पूरा गांव देखता था।वो बच्चे और माँ घर के काम के अलावा दुसरा काम भी दिन भर करते थे।जिससे गाँव मे उनकी बहुत इज्जत थी।और सब उनके मेहनत के कारण उनसे प्यार करते थे।बच्चे चाहे गरीबी के दिन देखे ।पर कोई गलत आदत या काम चोर ना होने से सबके प्रिय थे।कभी किसी दूसरे को भी किसी काम के लिए मना नहीं करते थे।और अपने घर से कही दूर दूर से लडकिया पानी भरती थी।
ओर तो ओर लडकिया माँ की तबियत ज्यादा खराब होने पर पूरे घर का काम अकेली ही कर लेती थी।उसके साथ बहुत अच्छे से पढ़ कर अपने माँ बाप का नाम भी रोशन किया।ओर बाहर के भी कही काम लड़को के जैसे किया करती थी।दुसरो के घर मेहंदी तो बच्चो को पढ़ाना ओर कही अनेक काम करती थी।जिससे पूरा गांव उनको जानता था।लेकिन कभी उन्होंने कोई ऐसा काम नही किया ।जिससे उनके माँ बाप का नाम नीचे हो।लड़के भी इसी तरह कही काम करते और पैसो को माँ बाप को देकर घर चलाने में सहयोग करते थे।
            उन बच्चो की मेहनत ईमानदारी और काम के कारण वो पूरे गाँव के ओर घर मे सब के प्रिय थे।
          ना लडकिया घर के काम के लिए आलसी या पीछे थी।जिस के कारण लड़कियों की शादी होने पर भी उन्हें अपने ससुराल में कभी किसी बात की परेशानी नही हुई।और जीवन की गंभीर समस्याओं को लड़कियों ने बहुत समझदारी से सामना किया।और ससुराल में उनको बहुत इज्जत ओर सम्मान मिला।अपने कर्मो के ओर मेहनत के कारण  ही वो एक अच्छी जिंदगियो का गुजारा कर रही है।
            औरत यदि आराम प्रिय है ।तो कभी वो अपनी तथा अपने पति की उन्नति नहीं कर सकती है।तथा उसका वैवाहिक जीवन भी कहीं लम्बे समय तक अच्छा नही चलता है।कभी ना कभी उसकी कमियां नजर आने लगती है। और तब रास्ते अलग होने के सिवा कुछ नही बचता है।
     क्योंकि जीवन मे सभी जगह आप के रूप से ज्यादा आप के गुणों की पूजा होती है।और कुछ समय के लिए आपको आपका जीवन साथी कुछ नही बोलेगा।लेकिन जिसने हमेशा मेहनत करी ओर मेहनत करते हुवे अपने घर को इतने बच्चो के साथ सम्भालते हुवे अपनी माँ और बहनों को देखा।वो जिस दिन बोला उस दिन आप के पास कुछ नहीं बचे गा।
       वैसे भी लड़की हो या लड़का जो काम करते है। वो ही सबके प्रिय होते है।क्योंकि श्री कृष्ण भगवान स्वयं गीता जी मे कर्म करने के लिए कहते है।
  ओर मानव को तो काम करना ही पड़ता है।जिस तरह हम सोते है,उठते है,साँस लेते है,बैठे रहते है,वैसे ही काम करना होता है।और जो जितना काम करता है।वो उतना ही सबका प्रिय होता है।
   बच्चो,सिर्फ अच्छे कपड़े पहने ओर अच्छे से तैयार होंने या बातो को करने से ही आप सब के प्रिय नहीं हो सकते है।आपको अपने अंदर की आलसीपन को छोड़ना होगा।तभी आपका जीवन अच्छा गुजरेगा।
क्योकि रूप के लिए थोड़े दिन तक लोग आपकी तारीफ करेगे।फिर वो काम देखेगे।इसलिए हमेशा अपने घर के काम को आगे से आगे करे।ये कभी इंतजार ना करे।कि कोई कहेगा।तब आप काम को करेगे।
   ओर सारा काम अपनी पसंद ओर अगर सिर्फ अपने बारे में सोचना इससे तो आप ओर भी दूसरों  की नजरों में खुद गर्ज हो जाओ गे।ओर जीवन के एक मोड़ पर आपके पास कुछ नही बचेगा।
इसलिए अपने से ज्यादा दुसरो के बारे में सोचने वाला उनकी पसंद का ध्यान रखने वाला ही जीवन मे दुसरो के लिए महत्वपूर्ण होता है।और भगवान भी उसी के साथ होते है।
 मेेरी इस कहानी का प्रकाशन इन्दौर उज्जैन के विनय उजाला पेेपर मेें हुआ।

Saturday, 4 April 2020

आओ दिप जलाये

आओ मिल संकल्प करें हम,         
देश हित ये काम करे हम।
           पर समय का भी ध्यान धरे हम,
           5 अप्रैल को भूल ना हम।
मिलकर के सब दिप जलाये,
9 बजे को भूल ना जाये।
            लाइट चालू कहीं रह ना जाये
               अंधियारा करके डिपो से
जगमग ज्योत जलाये,
9 मिनट तक पूरा करे
               एक साथ कामना करें हम,
                 विश्व विजय हो हमारा भारत,
कोरोना को दूर करो तुम,
ईश वंदना करे ये सब हम।         
                   आओ मिल संकल्प करें हम,
                    देश हित ये काम करे हम।
मिलकर दिप जलाये हम।

Friday, 3 April 2020

कोरोना नहीं होता

जैसे हर चमकती चीज का ,
  मतलब सोना नहीं होता।
वैसे हर एक छिक का  ,
मतलब कोरोना नही होता।
                 केवल पानी से हाथ धोना,
                    हाथ धोना नही होता।
               20 सेकंड साबुन से हाथ धोना,
                    जिससे  कोरोना नहीं होता।
ऐसे खतरनाक वायरस का,
 इलाज जादु टोना नही होता।
सावधानी,साफ सफाई रखने ,
   पर कोरोना नही होता।
                    जागरूकता सावधानी रखने वालों को ,
                             बाद में रोना नही होता।
                    भीड़ भाड़ से दूर रहने वालो को,
                            कभी कोरोना नही होता।
घर से बाहर जाना लोगो से ,
     हाथ मिलाना नही होता
क्योकि नमस्कार करने वालो को,
        कोरोना नही होता।
                        महामारी के इस दौर में,
                         हमे धैर्य खोना नहीं होता।
                     सेनेटाइजर ओर मास्क के प्रयोग से,
                         कोरोना नही होता।
समय रहते सचेत होंगे तो ,
अपनो को खोना नही होता।
रोगी स्वयं आइसोलेट हो जाये तो ,
ओरो को कोरोना नही होता।

Tuesday, 31 March 2020

भारत का झण्डा लहराना है

पावन है मातृभूमी मेरी,
पावन हैं कण- कण इसका,
सदियों से भारत का झण्डा लहराया है।  
इसलिये घर में हमको रहना है।                                                         जो फैली हवा में कोरोना गंदगी,
                  नामों निशा  मिटाये इसका,
                   अपने घरों में ही रुक कर दूर भगाते है।
झुकें ना देगें शीश माँ भारती,
तुझसे प्रण ये हम सबका,
सब तेरे चरणों मे शीश झुकाते है।
हम अपने घरों से बाहर नही निकलते है।                                         स्वतंत्रता के खातिर वीरो ने जान दी,
                     आज हमें अपनी जान बचाना है।
                      बार बार हाथ सेनेटाइजर से धोना है।
पावन है मातृभूमी मेरी,
पावन हैं कण- कण इसका,
विशव में भारत का झण्डा लहराना है।
                       🙏घर में रहोगें तो स्वस्थ रहोगे।
                         बाहर जाओगे तो अपने साथ 
                        परिवार देश को भी डूबाओगे।🙏

Monday, 9 March 2020

होली

होली आई होली आई रंग बिरंगा मौसम लाई,

लाल,गुलाबी नीला पीला सबसे प्यारा है कैसुला।

पूजा तू पिचकारी लाना ,फिर सबको तू खूब नहलाना,
हर्ष भागेगा इधर उधर,तनु भी जायेगी डर।

कार्तिक रंगों से खेलेगा,दक्ष गुबारे फेंकेगा,
तनु का भी देखो कमाल ,मुस्कान पर फेंकेगी गुलाल।

मुस्कान हो गई नीली पीली ,तनु पर हुई लाल पीली,
दोनों दौड़ी गिरी धड़ाम ,मुँह से निकला हाय राम।

केशव ने उड़ाई गुलाल,माधव की भी बदली चाल,
दोनों ने मिल कविता गाई,होली आई होली आई ।

होली के हैं रंग प्यारे,मिलकर खेले देखो सारे,
बैर भाव भूला कर सारे,मिले हम सब भाई चारे से।

                         कवियत्री
                             हेमलता पुरोहित

बेटी दिवस की शुभकामनाएं

 नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...