Saturday, 7 March 2020

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की शुभकामना

क्यों कहती है ये दुनिया,
         की नारी कमज़ोर है।
अरे आज तो उनके हाथों,
         गगन तक कि डोर है।
रोज नई क़ामयाबी पर,
           अब अपना नाम लिखती है।
 चूड़ी हो हाथो को सोचा,
              वो हथियार उठाती है।
अपनी अस्मत के ख़ातिर वो,
              वो युद्ध तक लड़ने जाती है।
लेकर क़लम हाथों में,
               नया इतिहास बनाती है।
नारी ना कमज़ोर रहीं अब,
                अपना परचम फैलाती है।
पैरों की जूती जो समझे ,
                 भूल वो भारी करते है।
जिसने उनको जन्म दिया,
                   वो भी तो एक नारी है।
कमज़ोर ना समझो नारी को,
                    वो दुर्गा, झाँसी रानी है।

Tuesday, 18 February 2020

विदाई

विदाई ये शब्द अपने आप मे ही कहीं ना कहीं दुख होने का एक अहसास करा देता है। जीवन में मिलना बिछड़ना तो होता ही लेकिन कुछ पल जो हमें जीवन भर याद रहते है। या जो जीवन में एक अजनबी से दोस्त गुरु या अपने बन जाते है।जिनसे बिछड़ के दुख होता है। ऐसा ही कुछ आज महसूस हुवा जब हमें भी एक बार फिर विदाई दी गई। ये एक बार फिर इस लिए कहा मैंने क्योंकि जीवन मे पहले भी कहीं विदाई हुई और उनको भुलाना ही मुश्किल था । कि आज एक ओर विदाई स्कूल से विदाई सबसे पहले दोस्तो गुरू को छोड़ने का दुख हुवा ,तब फिर मायके से विदाई, सभी को छोड़ना पडा ।तब वो घर जिसमें जन्म लेकर कब बड़े हुवे, कुछ पता ही नहीं, माँ का आँचल वो पिता का साया हर मुश्किल राह से बचाता रहा और जिंदगी ने एक विदाई ला दी।कि दुनिया की धूप में सब छोड़ के नया बसेरा बनाने चले ,एक डर से की कुछ गलत ना हो कोई हमसे दुःखी ना हो ।
शा•उ•मा•कनाड़िया से जब फिर एक बार आज विदाई हुई तो आँखों के सामने वो सारी बाते आने लगी । कि मैं जब यहाँ आई तब कितना खुश थी और आज जब  विदाई हो रही तो ऐसा लग रहा था । कि अपने कुछ पीछे छूट रहे थे। पूरा विद्यालय परिवार एक छोटी बच्ची के जैसे बड़े ही अच्छे से रखते थे। ओर कैसे एक साल गुजर गया। पता ही नही चला।  साथ छूटने की कड़ी में कहीं और साथी छूट गए।कही पिता सा मार्गदर्शन तो कही बहनों का प्यार और भाई सा दुलार भी शामिल था  जिन्होंने जीवन के बहुत से ज्ञान भी दिया और सिख भी दी।
आज मन कुछ उदास तो है उन सभी के छूट जाने का वैसे ये विदाई नही हुई थी ।
तब तक इस बात का अहसास नहीं था।पर आज जब हुवा तो एक बार फिर सारी विदाई याद आगयी ।की कैसे एक एक कर के विदाई से सब बिछड़ गए।
               आज फिर वक्त को रोकने का मन करता है
                पीछे  लौटने का   मन  करता  है
                 जो छुटे पिछे वो अनमोल रत्न थे
                 उनको शुक्रिया करने का मन करता है
                 



Thursday, 6 February 2020

माँ

*माँ तुम*..😢
*बहुत याद आ रही हो*
*एक बात बताऊँ*...
*आजकल*...
*तुम मुझमें समाती जा रही हो*☺


*आइने में अक्सर*
*तुम्हारा अक्स उभर आता है*
*और कानों में अतीत की*
*हर एक बात दोहराता है*

*तुम मुझमें हो या मैं तुममें*
*समझ नहीं पाती हूँ*
*पर स्वयं को आज*
*तुम्हारे स्थान पर खड़ा पाती हूँ*

*तुम्हारी जिस-जिस बात पर*
*कभी नाराज़ होती थी*
*झगड़ा भी किया करती थी*

*वही सब*..
*अब स्वयं करने लगी हूँ*
*अन्तर केवल इतना है कि*
*तब वक्ता थी और आज*
*श्रोता बन गई हूँ*

*हर पल  राह देखती*
*तुम्हारी आँखें* ....
*आज मेरी आँखों मे बदल गई हैं*
*तुम्हारे दर्द को*
*आज समझ पाती हूँ*
*जब तुम्हारी ही तरह*
*स्वयं को उपेक्षित सा पाती हूँ*


*मन करता है मेरा*.
*फिर से अतीत को लौटाऊँ*
*तुम्हारे पास आकर*
*तुमको खूब लाड़ लड़ाऊँ*
*आज तुम बेटी*
*और मैं माँ बन जाऊँ*

              🙏🏻 *माँ*🙏🏻
                

Saturday, 25 January 2020

तीन रंग तिरंगा प्यारा

लगता सबसे न्यारा न्यारा,
प्यारा भारत देश हमारा,
ऊँचा है सविधान हमारा🇮🇳
             अलग धर्म अलग भाषा है,
              सबकी एक  अभिलाषा है,
               प्यारा भारत देश हमारा,
           🇮🇳   ऊँचा हे संविधान हमारा।
जाति और समुदाय को लेकर,
देश ना बट जाए दोबारा,
 प्यारा भारत देश हमारा,
 ऊँचा हे संविधान हमारा।🇮🇳
               🇮🇳छोड़ दो हिन्दू मुस्लिम नारा,
                सब ओर हो केवल भाई चारा,
                 प्यारा भारत देश हमारा,
                  ऊँचा हे संविधान हमारा।
कमजोर नही सशक्त बनो,
देशवासी नहीं देशभक्त बनो,
प्यारा भारत देश हमारा,
ऊँचा हे संविधान हमारा।🇮🇳
                    कवयित्री  हेमलता पुरोहित
सभी को गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामना🙏

Thursday, 23 January 2020

दरिंदगी की हद हो गई

एक अकेली अबला पर
कितने गिद्ध टूट पड़े,
दरिंदगी की हद हो गई
अब तो गुस्सा फूट पड़े।

        हर रिश्ते को किया तार तार,
         अपनी भूख मिटाने को,
         ऐसे वेशी घूम ना पाए
          चलो सबक सिखाने को।
नारी नहीं सामान भोग की,
ये जिसने ना सोचा था,
काट फेंक दो हाथ उसकी के,
जिसने उसको नोचा था।
          लटका दो उसको फाँसी पर,
           जिसने अस्मत लूटी थी,
           दे दो न्याय अगर दे सको,
           जिसकी इज्जत लूटी थी।
बदलो परिभाषा न्याय की,
अपना देश बदल जायेगा,
हैवानियत के दरिंदो को,
तभी समझ में आयेगा।
        ऐसी सजा इन्हें दो की
         रूह कांप जाए देखने वालों की
         फिर कोई सोच ना पाय
         इज्जत पर हाथ डालने की।
                      कवयित्री Hemlata Purohit

Monday, 20 January 2020

बेटी की फटकार

आते ही दुनिया मे सनाटा छा गया,
खुशिया ना मिली मुझको मातम सा छा गया।
                      होते ही मेरी माँ ने भी आँखे फेर ली,
                      बेटे की थी आस उसको नजरें तरेर ली।
जो आया मिलने माँ, से दिलासा दे गया,
देख मेरी ओर,माँ को निराशा दे गया।
                     क्या इतना बुरा था मेरा दुनिया में आना,
               जितना बुरा न था किसीका दुनिया से जाना।
कमजोर ना बन माँ,तू मुझमें समा गई,
मै बनके तेरी ताकत दुनिया में आ गई।
                     बेटे से बढ़कर  मै तेरा अभिमान रखूंगी,
                  ख़ुद से भी बढ़कर मैं तेरा सम्मान रखूंगी।
ना हो निराश देख मेरी ओर प्यार से,
क्यो शोक में डूबी,लगा सीने से प्यार से।
                   ना सोचा मैंने  कि तू इतना खेद करेंगी,
                   दुनिया की तरह तू भी भेद करेंगी।
भगवान का है रूप तू मुझको स्वीकार कर,
नारी है तू भी सोच कर मुझे अंगीकार कर।
                         
                           कवयित्री
                    हेमलता पुरोहित

Thursday, 9 January 2020

पैसे की महिमा

मुझको लगता इस दुनिया में, एक अचम्बा ऐसा हैं।
रिश्ते-नाते सभी झूठ हैं, सच्चा केवल पैसा है।।

पैसे के दम पर इठलाये,हर कोई नर और नारी।
संभल के भैया बात करो,तुम पैसा सब पर भारी।।

भारी भरकम पैसे वाला,दिखता सबसे अलग है।
उसके नखरे चलते-फिरते ,देखे जग में लोग है।।

जग में केवल चलता हैं, उनके नाम का सिक्का।
जिसके पत्तों में होता हैं, चिड़ी पान का इक्का।।

इक्के से फिर याद आ गया,खेल हमे भी अपना।
मालामाल होने के लिए,चलो सोकर देखे सपना।।

सपने में भैया तुम तो ,बस राम-राम ही जपना।
 समझो तुम तो अब, पराया माल भी अपना।।

अपना- पराया छोड़ दे बंदे,छोड़ दे तेरा- मेरा।
रिश्तों से नाता जोड़,पैसा मेल हैं हाथ का तेरा।।

तेरा पैसा एक दिन तुझको इस रंग दिखायेगा।
माल खायेगे वो सब ओर,तू सुखी रोटी नहीं खाएगा।।

                                   
                                      कवयित्री
               हेमलता पुरोहित



बेटी दिवस की शुभकामनाएं

 नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...