Tuesday, 30 April 2019
Saturday, 27 April 2019
ये ख़ुशी है या गम
कैसी ये परम्पराये है दिल नही मानते हुवे भी उनको मानना पड़ता है आप ही बताई ये की खुशियों में तो लोग नही होते हुवे भी ज्यादा करते है क्यो की वो उनके ख़ुशी के पल होते है तो क्या किसी के मरने पर भी लोग उतने ही खुश होते है तो नही होते हुवे भी तब भी ज्यादा से ज्यादा करते है बल्कि गिफ्ट भी दिए जाते है कही कही तो गोल्ड दिया जाता है क्या गम में लोग दुख को भूलना ज्यादा अच्छा है या उसका एक ओर रसम बनाके अदा करना ये तो ऐसा होगया जैसे मरने वालों की भी बहुत ख़ुशी है एक तरह से शादी भी 2 या 3 तीन की होती है पर वो तो 12 दिन के बाद भी पूरे साल कुछ ना कुछ चलता ही रहता है ऐसे में उस परिवार को एक इंसान के जाने के गम को भूलना ओर जिंदगी को नए सिरे से चलाने में कितनी मुश्किल होती होगी वो उन्हें भूला तो नही सकता कभी जीवन मे पर उनके बिना जीना सीखना उनकी यादों को संजोने में लगे कि लोग लाज की डर से फिर वो की लोग कहेंगे कि मरने वालों के प्रति भी हमारे कुछ कर्तव्य होते है कुछ लोग ऐसी दलीले देते है तो क्या वो कर्तव्य उनके जीवित अवस्था मे पूरे नही किये गए जो अब लोगो को दिखाने के लिए किए जारहे है अगर हम जीवित इंसान के दिल को ही ना दुखाए ओर ना ही कभी कोई ऐसा काम करे कि हमे लगे कि अब हमें लोगो को सफाई देने की जरूरत है जो करना है इंसान के जीने पर करो मरने के बाद तो सिर्फ अपने लिए ही क्यो की मरने के बाद कभी किसी को कुछ नही मिलता |ये परम्पराये कितनी ग़लत है इन्हें बदलना सब चाहते है पर कदम कोई नही बढ़ाना चाहता|
हाँ जहा लोग शिक्षित हुवे उन्होंने देखा कि इन परम्पराओ से बिचारे गरीबो को नीचे देखना पड़ता है वहा लोगो ने इसे बहुत ही कम या बंद ही कर दिया है
पर ये बात सोचने वाली है कि किसी के दर्द में हम उसको कम करने की सोचना चाइये
विधाता ने जहाँ पीर दी है
दिल को चीर देने वाली
उस पीर में कैसे करे कोई
भात चावल हलवे की बात
ये तो एक दर्द में किसी के
ख़ुशी मनाने जैसा ना हुवा
ये अभी कम कहा था तभी
अंदर से आवाज आई कि
कुछ सोना भी तो देना पड़ेगा
क्या देना इस दुख की घड़ी को
सुख में बदलने के लिए था
या जाने वाले को फिर बुलाने के लिए था
ये बात समझ आती नही थी
की फिर गुथी कही और
जाती गयी जाने वाले के गम
को यू ओर गम दिया गया और
जीवन चलता कभी कभी
प्रकृति का भी नियम है कि जो बदलता नही वो नष्ट हो जाता है तो हमे अपनी संस्कृति को बचाने के लिए उसमे बदलाव की बहुत जरूरत है🙏🙏
हाँ जहा लोग शिक्षित हुवे उन्होंने देखा कि इन परम्पराओ से बिचारे गरीबो को नीचे देखना पड़ता है वहा लोगो ने इसे बहुत ही कम या बंद ही कर दिया है
पर ये बात सोचने वाली है कि किसी के दर्द में हम उसको कम करने की सोचना चाइये
विधाता ने जहाँ पीर दी है
दिल को चीर देने वाली
उस पीर में कैसे करे कोई
भात चावल हलवे की बात
ये तो एक दर्द में किसी के
ख़ुशी मनाने जैसा ना हुवा
ये अभी कम कहा था तभी
अंदर से आवाज आई कि
कुछ सोना भी तो देना पड़ेगा
क्या देना इस दुख की घड़ी को
सुख में बदलने के लिए था
या जाने वाले को फिर बुलाने के लिए था
ये बात समझ आती नही थी
की फिर गुथी कही और
जाती गयी जाने वाले के गम
को यू ओर गम दिया गया और
जीवन चलता कभी कभी
प्रकृति का भी नियम है कि जो बदलता नही वो नष्ट हो जाता है तो हमे अपनी संस्कृति को बचाने के लिए उसमे बदलाव की बहुत जरूरत है🙏🙏
Friday, 26 April 2019
Thursday, 18 April 2019
अनजान रास्तो पर चलती ये छोटी सी परी ना जाने जमाने के कितने दस्तूर ओर रिश्तो ओर उनके रूपो में जीना है इसे पर सबको खुश रखना और रिश्तों को अच्छे से निभाना ये ही इसकी दुनिया है छोटी सी परी देखते देखते बड़ी हो गयी और अचानक एक दिन उसकी शादी हो गयी परी ने वहां भी अपने दिल को प्यार से समझाया और हर रिश्ते को दिल से निभाया लेकिन अचानक एक दिन बड़ी जिम्मेदारी परी के पास आई छोटी परी जल्दी से बडी हो गईं परी के ससुराल में थी एक जेठानी ओर प्यारा सा राजकुमार उनके घर आया तभी अचानक परी की सास भी बाहर गयी कुछ दिनों के लिए अब परी को ही सब कुछ था देखना बताओ ?
आप लोग राजकुमार है ऑपरेशन से है आया तो क्या डॉक्टर थी परी ?
परी ने सब कुछ जो करना था एक माँ को एक बड़ी बहन को वो सब अकेले किया
फिर भी परी को आखिर में कोई प्यार ना मिला
डॉक्टर ने ऑपरेशन के टाके लगाए अगर निशान रह गए तो उसमें परी क्या करे और अब ना माने कोई परी के फर्ज का मोल उल्टा सुनाये उसे दो बोल
तो क्यो ना जब ससुराल में हुवा ऐसा कुछ ऐसा तो ले क्यो ना गए कोई परी से दूर बाते करना और काम करना
दोनों अलग अलग बाते होती है जो इन बातों में नही समझती थी उसने सारे काम किये भरी धूप में कही बार राजकुमार को हॉस्पिटल ले गयी और तो ओर कही ऐसे काम है जो कोई नही करता वो भी किये फिर भी सुनती उल्टे बोल
अगर आप किसी के लिए बुरा सोचते ओर बोलते हो तो वो पहले अपने लिए ही होता है जैसे कुवा दुसरो के लिए खोदते है और उसमें गिरना अपने को ही पड़ता है
ये बात हम गीता में भी देखते है कि कौरव पांडवों का बुरा चाहते थे और अंत मे विनाश उनका ही हुवा
आप लोग राजकुमार है ऑपरेशन से है आया तो क्या डॉक्टर थी परी ?
परी ने सब कुछ जो करना था एक माँ को एक बड़ी बहन को वो सब अकेले किया
फिर भी परी को आखिर में कोई प्यार ना मिला
डॉक्टर ने ऑपरेशन के टाके लगाए अगर निशान रह गए तो उसमें परी क्या करे और अब ना माने कोई परी के फर्ज का मोल उल्टा सुनाये उसे दो बोल
तो क्यो ना जब ससुराल में हुवा ऐसा कुछ ऐसा तो ले क्यो ना गए कोई परी से दूर बाते करना और काम करना
दोनों अलग अलग बाते होती है जो इन बातों में नही समझती थी उसने सारे काम किये भरी धूप में कही बार राजकुमार को हॉस्पिटल ले गयी और तो ओर कही ऐसे काम है जो कोई नही करता वो भी किये फिर भी सुनती उल्टे बोल
अगर आप किसी के लिए बुरा सोचते ओर बोलते हो तो वो पहले अपने लिए ही होता है जैसे कुवा दुसरो के लिए खोदते है और उसमें गिरना अपने को ही पड़ता है
ये बात हम गीता में भी देखते है कि कौरव पांडवों का बुरा चाहते थे और अंत मे विनाश उनका ही हुवा
Sunday, 7 April 2019
Thursday, 4 April 2019
Wednesday, 3 April 2019
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बेटी दिवस की शुभकामनाएं
नही पढी लिखी थी मां मेरी ना उसने कभी ये बधाई दी बेटी होने पर मेरे भी ना उसने जग मे मिठाई दी हो सकता समय पुराना था मोबाइल ना उसके हाथो मे था...
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कई जन्म के पुण्य हमारे, जब संचित हो जाते हैं। तब पुत्री के रूप में कोई, कन्या को हम पाते हैं।। सहज नही होती है कन्या, करुणा की अवतारी है। शक...
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अपने दुःख दर्द छिपाने का बस बचा एक ही जरिया है जब पूछे कोई कैसे हो हम कह देते सब बढ़िया है चेहरे पर मुस्कान लिए ...






